🙏 दर्शन और पूजा:

यहाँ पर:

  • रुद्राभिषेक

  • महामृत्युंजय जाप

  • कालसर्प दोष निवारण पूजा

  • पिंडदान व श्राद्ध आदि किए जाते हैं।

🔱 त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

स्थान: त्र्यंबकेश्वर, नासिक ज़िला, महाराष्ट्र
नदी: यह मंदिर गौतमी गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।
महत्व: यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।


                                   विशेषताएँ:

  1. तीनों मुखों वाले शिवलिंग
    त्र्यंबकेश्वर का शिवलिंग बेहद अद्वितीय है – इसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों देवताओं के प्रतीक रूप एक साथ विद्यमान हैं।
    इसलिए इसे “त्र्यंबक” कहा जाता है – तीन नेत्रों वाला (त्रि + अंबक = त्र्यंबक)।

  2. जल में स्थित शिवलिंग
    शिवलिंग सदैव जल में डूबा रहता है, जिससे इसका महत्व और रहस्य और भी बढ़ जाता है।

  3. कालसर्प दोष निवारण का प्रमुख स्थान
    त्र्यंबकेश्वर मंदिर को कालसर्प दोष निवारण, नारायण नागबली पूजा, और पिंडदान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

  4. कुंभ मेले का आयोजन
    त्र्यंबकेश्वर उन चार स्थानों में से एक है जहाँ कुंभ मेला आयोजित होता है (हर 12 साल में एक बार)।

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